घर में पूजा सरल है। सबसे महत्वपूर्ण है नियमितता, स्वच्छता और सच्चा हृदय। अधिकांश वैष्णव घरों में इन मूल सिद्धांतों का पालन किया जाता है।

विग्रहों को स्पर्श करने या भोग तैयार करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। वेदी को धूल-मुक्त रखें और जल के पात्र प्रतिदिन बदलें।
हर दिन लगभग एक ही समय पर विग्रहों को जगाएँ, आरती और भोग अर्पित करें, और उन्हें विश्राम दें। नियमितता स्वयं एक अर्पण है।
विग्रहों को ध्यान में रखकर, बिना चखे, भोजन पकाएँ और समर्पित थालियों में अर्पित करें। अर्पित भोजन प्रसाद बन जाता है।
घंटी बजाएँ और क्रम से वस्तुएँ अर्पित करें: धूप, घी का दीपक, शंख में जल, वस्त्र, पुष्प, तथा चामर और पंखा। प्रत्येक वस्तु को विग्रह के सामने घुमाएँ।
ऋतु और त्योहारों के अनुसार वस्त्र बदलें। सर्दियों में गर्म कपड़े, और गर्मियों में हल्की सूती पोशाक तथा चंदन।
बिना आवश्यकता विग्रहों की ओर पीठ न करें, वेदी के सामने भोजन न करें और न सोएँ, तथा प्रवेश करते और बाहर निकलते समय दंडवत प्रणाम करें।
पवित्र नाम पूजा का हृदय है। विग्रहों के सामने जप करने से प्रत्येक सेवा ध्यान में बदल जाती है।