वे शब्द जिन्हें वेदी के पास रखा जा सके। हिन्दी अनुवाद कृष्णकृपाश्रीमूर्ति श्री श्रीमद् ए.सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद की «Bhagavad-gita As It Is» (श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप) के अंग्रेज़ी अनुवादों पर आधारित हैं।

“यदि कोई प्रेम और भक्ति के साथ मुझे पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पित करता है, तो मैं उसे स्वीकार करता हूँ।”भगवद्गीता 9.26
“लेकिन जो लोग सदैव अनन्य भक्ति के साथ मेरी पूजा करते हैं और मेरे दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हैं—उनके लिए जो कुछ आवश्यक है, वह मैं स्वयं ले आता हूँ, और उनके पास जो कुछ है, उसकी रक्षा करता हूँ।”भगवद्गीता 9.22
“अपने मन को सदैव मेरा चिंतन करने में लगाओ, मेरे भक्त बनो, मुझे प्रणाम करो और मेरी पूजा करो। इस प्रकार मुझमें पूर्ण रूप से लीन होकर तुम निश्चय ही मेरे पास आओगे।”भगवद्गीता 9.34
“सदैव मेरा चिंतन करो, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो और मुझे नमस्कार करो। इस प्रकार तुम निश्चय ही मेरे पास आओगे। मैं तुमसे यह प्रतिज्ञा करता हूँ, क्योंकि तुम मेरे अत्यन्त प्रिय मित्र हो।”भगवद्गीता 18.65